Acne Laser Scar Treatment न कराने के नुकसान
1. दाग स्थायी हो सकते हैं
अगर समय पर इलाज न किया जाए तो मुंहासों के गड्ढे और निशान हमेशा के लिए रह सकते हैं।
2. त्वचा असमान (Uneven) हो जाती है
चेहरे की सतह उबड़-खाबड़ दिखने लगती है, जिससे चेहरा साफ और स्मूद नहीं लगता।
3. उम्र के साथ दाग और गहरे दिखने लगते हैं
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, collagen कम होता है और पुराने scars और ज्यादा स्पष्ट दिखने लगते हैं।
4. आत्मविश्वास में कमी
चेहरे पर दाग होने से व्यक्ति झिझक महसूस करता है, लोगों से मिलने या फोटो खिंचवाने में संकोच करता है।
5. मेकअप से पूरी तरह नहीं छुपते
गहरे acne scars को makeup से भी पूरी तरह कवर नहीं किया जा सकता।
6. स्किन के अन्य इलाज कम असरदार हो जाते हैं
बहुत पुराने scars पर क्रीम या घरेलू उपाय लगभग बेअसर हो जाते हैं।
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✅ Acne Laser Scar Treatment कराने के फायदे
1. दाग-धब्बों में स्पष्ट सुधार
लेज़र उपचार से acne scars काफी हद तक हल्के हो जाते हैं।
2. त्वचा स्मूद और समान होती है
गड्ढों में सुधार होता है और चेहरे की texture बेहतर दिखने लगती है।
3. Collagen बनने की प्रक्रिया तेज होती है
लेज़र त्वचा के अंदर collagen को सक्रिय करता है, जिससे skin खुद को repair करती है।
4. प्राकृतिक और लंबे समय तक रहने वाले परिणाम
सही तरीके से किया गया लेज़र इलाज natural-looking results देता है।
5. सुरक्षित और आधुनिक तकनीक
यह एक clinically proven और controlled procedure है, जब विशेषज्ञ द्वारा किया जाए।
6. आत्मविश्वास में जबरदस्त बढ़ोतरी
साफ और बेहतर त्वचा मिलने से व्यक्ति का confidence वापस आता है।
7. कम समय में असर
कुछ sessions के बाद ही सुधार दिखने लगता है।
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मरीजों के लिए जरूरी सलाह
Acne scars जितने पुराने, इलाज उतना लंबा हो सकता है
समय पर इलाज कराने से बेहतर और जल्दी परिणाम मिलते हैं
हमेशा इलाज qualified skin / laser specialist से ही कराएं
Keloid hota kya hai
🔴 Keloid क्या होता है?
Keloid एक तरह का मोटा, उभरा हुआ और सख़्त दाग (scar) होता है, जो किसी चोट, कट, सर्जरी, पिंपल, जलन, वैक्सिंग या कान छिदवाने के बाद बन जाता है।
यह सामान्य घाव से ज़्यादा बढ़ता चला जाता है और अपने आप ठीक नहीं होता।
🔴 Keloid क्यों बनता है? (कारण)
त्वचा का ज़्यादा कोलेजन बनाना
छोटी चोट या सुई का निशान
सर्जरी या ऑपरेशन
पिंपल या फोड़ा
कान या नाक छिदवाना
वैक्सिंग / थ्रेडिंग
जलने के बाद
👉 कुछ लोगों में जेनेटिक (वंशानुगत) कारणों से भी keloid बनने की संभावना ज़्यादा होती है।
🔴 Keloid किन लोगों में ज़्यादा होता है?
जिनकी त्वचा डार्क या व्हीटिश होती है
10–30 साल की उम्र में
जिनके परिवार में पहले से keloid का इतिहास हो
🔴 Keloid कहां-कहां हो सकता है?
छाती (Chest)
कंधे
कान (Ear lobe)
गर्दन
पीठ
जबड़ा
बाजू
🔴 Keloid के लक्षण (Symptoms)
उभरा हुआ मोटा दाग
लाल, गुलाबी या गहरा रंग
खुजली या जलन
दर्द या खिंचाव
धीरे-धीरे आकार में बढ़ना
🔴 Keloid और सामान्य दाग में अंतर
सामान्य दाग
Keloid
घाव की सीमा तक रहता है
घाव से बाहर फैलता है
धीरे-धीरे हल्का होता है
समय के साथ बड़ा हो सकता है
ज़्यादातर अपने आप ठीक
अपने आप ठीक नहीं होता
🔴 Keloid का इलाज (Treatment)
⚠️ Keloid का इलाज डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।
✅ 1. Steroid Injection
सबसे आम और असरदार इलाज
सूजन कम करता है
धीरे-धीरे आकार घटता है
✅ 2. Laser Treatment
रंग और मोटाई कम करने में मदद
दर्द और खुजली कम होती है
✅ 3. Cryotherapy (फ्रीज़ करना)
छोटे keloid में उपयोगी
दाग को जमाकर छोटा किया जाता है
✅ 4. Silicone Gel / Sheet
शुरुआती stage में फायदेमंद
रोज़ लगाने से सुधार
✅ 5. Surgery (ऑपरेशन)
बहुत बड़े keloid में ⚠️ अकेले सर्जरी करने से keloid दोबारा बन सकता है
इसलिए सर्जरी के साथ Injection या Laser ज़रूरी होता है।
🔴 क्या Keloid पूरी तरह खत्म हो सकता है?
👉 पूरी तरह खत्म होना मुश्किल है
लेकिन सही इलाज से:
आकार काफी कम हो सकता है
दर्द और खुजली खत्म हो सकती है
दिखने में काफ़ी बेहतर हो जाता है
🔴 Keloid से बचाव (Prevention)
बिना ज़रूरत सर्जरी न करवाएं
कान / नाक छिदवाने से बचें (अगर पहले keloid हुआ हो)
पिंपल को न दबाएं
चोट के बाद सही इलाज करें
डॉक्टर की सलाह से Silicone gel का उपयोग करें
🔴 कब डॉक्टर को दिखाएं?
दाग लगातार बढ़ रहा हो
दर्द या खुजली ज़्यादा हो
कान में keloid बन गया हो
दिखने में परेशानी हो रही हो
Skin Volume Loss (त्वचा का भराव कम होना) क्या है?जब चेहरे की त्वचा पतली, ढीली या धंसी हुई दिखने लगे, गाल पिचक जाएँ, अंडर-आई खोखले दिखें—इसे Volume Loss कहते हैं।कारणउम्र बढ़ना (Collagen & Fat कम होना)अचानक वजन कम होनाधूप / प्रदूषणहार्मोनल बदलावगलत स्किन केयरलक्षणगालों की fullness कम होनाझुर्रियाँ और fine lines बढ़नाचेहरा थका-सा दिखनाJawline का sharp न रहनाइलाज / Solutions (Clinic Treatments)Dermal Fillers – तुरंत volume और liftPRP Therapy – natural collagen boostLaser / RF Treatments – skin tighteningSkin Boosters – hydration + glow
Crow’s feet क्या है?
आंखों के बाहरी किनारों पर बनने वाली बारीक रेखाएं/झुर्रियां ही crow’s feet कहलाती हैं। ये उम्र बढ़ने, धूप और स्किन ड्राइनेस के कारण होती हैं।
कारण
उम्र बढ़ना (Collagen कम होना)
ज्यादा धूप में रहना
आंखें बार-बार सिकोड़ना/मुस्कुराना
ड्राई स्किन
नींद की कमी
स्मोकिंग
लक्षण
आंखों के किनारे फाइन लाइन्स
हंसते समय झुर्रियां ज्यादा दिखना
स्किन ढीली लगना
बचाव (Prevention)
रोज़ SPF 30+ सनस्क्रीन आंखों के आसपास भी
आई क्रीम (Hyaluronic acid, Vitamin-C, Retinol* रात में)
पर्याप्त पानी पिएं
पूरी नींद लें
धूप में सनग्लास पहनें
*Retinol गर्भावस्था में न लें
इलाज (Treatment Options)
Botox – जल्दी और असरदार रिज़ल्ट
Dermal Fillers – गहरी लाइन्स के लिए
Laser Treatment – स्किन टाइटनिंग
PRP / Mesotherapy – स्किन रीजुवेनेशन
Medical-grade Eye Peels
> सही इलाज उम्र, स्किन टाइप और झुर्रियों की गहराई देखकर चुना जाता है।
गैंग्रीन एक बहुत गंभीर और जानलेवा बीमारी हो सकती है, अगर समय पर इलाज न मिले। इसमें शरीर के किसी हिस्से (जैसे पैर की उंगली, पैर, हाथ) की टिश्यू (मांस/त्वचा) मरने लगती है, क्योंकि वहाँ खून की सप्लाई रुक जाती है या इंफेक्शन बहुत बढ़ जाता है।
गैंग्रीन कितना खतरनाक है?
1️⃣ उंगली या अंग कटने का खतरा
अगर गैंग्रीन बढ़ता गया तो
👉 पैर की उंगली, पैर या हाथ काटना (Amputation) पड़ सकता है
खासकर डायबिटीज़ मरीजों में यह खतरा बहुत ज़्यादा होता है
2️⃣ खून में ज़हर फैल सकता है (Sepsis)
गैंग्रीन में इंफेक्शन खून में फैल सकता है
इससे हो सकता है:
तेज बुखार
बीपी गिरना
बेहोशी
मौत तक का खतरा
👉 यह स्थिति इमरजेंसी होती है
3️⃣ बहुत तेज दर्द या सुन्नपन
शुरुआत में तेज दर्द
बाद में नसें मरने लगती हैं, इसलिए सुन्नपन हो जाता है
यह संकेत है कि बीमारी काफी बढ़ चुकी है
4️⃣ बदबू और काला पड़ना
प्रभावित जगह
काली / नीली / हरी हो जाती है
बहुत तेज़ बदबू आने लगती है
यह साफ संकेत है कि टिश्यू मर रही है
5️⃣ जान को खतरा
अगर इलाज में देर हुई तो
👉 जान भी जा सकती है
खासकर बुज़ुर्ग, डायबिटीज़, हार्ट या किडनी के मरीजों में खतरा ज्यादा
गैंग्रीन किन लोगों में ज्यादा होता है?
✔️ डायबिटीज़ मरीज
✔️ पैरों की नसों में ब्लॉकेज (Varicose / Peripheral Artery Disease)
✔️ लंबे समय से घाव
✔️ धूम्रपान करने वाले
✔️ चोट या जलने के बाद सही इलाज न होना
गैंग्रीन के शुरुआती लक्षण (Warning Signs)
🚨 इन लक्षणों में देर न करें:
घाव का ठीक न होना
उंगली या पैर का रंग बदलना
सूजन, दर्द
बदबूदार पानी/पीप
बुखार
क्या करें? (बहुत ज़रूरी)
✔️ तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ
✔️ खुद से दवा या घरेलू इलाज न करें
✔️ ब्लड शुगर कंट्रोल रखें
✔️ पैरों की रोज़ जांच करें (डायबिटीज़ मरीज)
निष्कर्ष
> गैंग्रीन बहुत खतरनाक हो सकता है,
लेकिन समय पर इलाज से
👉 अंग और जान दोनों बचाई जा सकती हैं।
Mole Removal का Laser Treatment क्यों Best माना जाता है?
Laser से Mole हटाना क्यों अच्छा है?
1️⃣ बिना चीरा-टांका
लेज़र में कट या सिलाई नहीं लगती
इसलिए दर्द बहुत कम होता है
2️⃣ निशान (Scar) बहुत कम
सर्जरी की तुलना में
लेज़र से दाग पड़ने का खतरा कम होता है
खासकर चेहरे के लिए best option
3️⃣ जल्दी ठीक होना
ट्रीटमेंट के बाद
2–7 दिन में स्किन रिकवर हो जाती है
रोज़मर्रा के काम जल्दी शुरू कर सकते हैं
4️⃣ सुरक्षित और सटीक इलाज
लेज़र सिर्फ mole पर काम करता है
आसपास की स्किन सुरक्षित रहती है
5️⃣ इंफेक्शन का खतरा कम
खुला ज़ख्म नहीं बनता
इसलिए infection का risk बहुत कम होता है
6️⃣ OPD में होने वाला इलाज
भर्ती होने की ज़रूरत नहीं
10–20 मिनट में प्रोसीजर पूरा
7️⃣ बेहतर cosmetic result
स्किन स्मूद दिखती है
चेहरा ज़्यादा नैचुरल लगता है
Laser Mole Removal कब कराना चाहिए?
✔ चेहरे या गर्दन पर mole हो
✔ mole बढ़ रहा हो या रंग बदल रहा हो
✔ सौंदर्य (beauty) की वजह से
✔ बार-बार चोट लगती हो
अगर safe, fast, कम दर्द और कम निशान वाला इलाज चाहते हैं, तो
Mole Removal का Laser Treatment सबसे अच्छा विकल्प है।
Skin grafting तब कराई जाती है जब ज़ख्म अपने-आप ठीक नहीं हो रहा हो या नई स्किन बनने की क्षमता खत्म हो गई हो।
Skin Grafting क्यों ज़रूरी होती है?
1️⃣ ज़ख्म जल्दी भरने के लिए
बड़े, गहरे या पुराने ज़ख्म महीनों तक नहीं भरते
Skin graft लगाने से healing तेज़ हो जाती है
2️⃣ इंफेक्शन से बचाव
खुले ज़ख्म में बार-बार इंफेक्शन का खतरा रहता है
नई स्किन लगने से ज़ख्म कवर हो जाता है, जिससे इंफेक्शन कम होता है
3️⃣ दर्द और रिसाव कम होता है
खुले ज़ख्म में दर्द और पानी/खून निकलता रहता है
Skin graft से दर्द, जलन और रिसाव कम हो जाता है
4️⃣ हाथ-पैर की काम करने की क्षमता बचती है
लंबे समय तक ज़ख्म रहने से जकड़न आ जाती है
Skin grafting से movement बेहतर रहती है
5️⃣ जलने के बाद नई स्किन पाने के लिए
Burns में स्किन खुद नहीं बन पाती
Skin grafting से नई और मजबूत स्किन मिलती है
6️⃣ पुराने अल्सर में (Diabetic / Varicose Ulcer)
डायबिटीज़ या वेरिकोज़ वेन्स में घाव सालों तक नहीं भरते
Skin grafting से घाव बंद होता है और बार-बार बनने से बचाव होता है
7️⃣ दिखावट और आत्मविश्वास बेहतर
ज़ख्म बंद होने से skin की शेप और रंग धीरे-धीरे नॉर्मल होता है
मरीज का confidence बढ़ता है
किन मामलों में सबसे ज़्यादा फायदा होता है?
✔ जलने के बाद
✔ एक्सीडेंट के ज़ख्म
✔ डायबिटिक फुट
✔ वेरिकोज़ वेन्स के अल्सर
✔ लंबे समय से न भरने वाले घाव
जब ज़ख्म खुद से नहीं भर रहा हो, बार-बार इंफेक्शन हो रहा हो या स्किन खराब हो गई हो, तब Skin Grafting सबसे असरदार और सुरक्षित इलाज है।
Hair line पीछे जा रही हो तो क्या करें?
1️⃣ शुरुआती स्टेज (बाल पतले हो रहे हैं, हल्की hair line पीछे)
इस स्टेज पर बाल बचाए जा सकते हैं
✔ PRP थैरेपी
✔ GFC ट्रीटमेंट
✔ दवाइयाँ (डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह से)
✔ लाइफस्टाइल सुधार (नींद, डाइट, स्ट्रेस कंट्रोल)
➡ PRP / GFC से:
बालों की जड़ें मज़बूत होती हैं
Hair fall कम होता है
Hair thickness बेहतर होती है
Hair line और पीछे जाने से रुकती है
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2️⃣ मिड स्टेज (Hair line साफ़ पीछे जा चुकी है, नए बाल नहीं आ रहे)
यहाँ PRP/GFC अकेले काफ़ी नहीं होते
✔ Hair Transplant की सलाह दी जाती है
✔ Transplant के बाद PRP / GFC result को बेहतर बनाते हैं
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3️⃣ एडवांस स्टेज (फ्रंट एरिया बिल्कुल खाली)
Hair Transplant ही best option होता है
✔ Permanent solution
✔ Natural hair line design
✔ बाद में PRP/GFC maintenance के लिए
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PRP और GFC में फर्क
PRP:
आपके खून से platelets निकालकर लगाया जाता है
Hair fall control + growth support
GFC:
PRP से ज्यादा advanced
ज़्यादा growth factors
Faster और बेहतर result
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क्या सबसे सही रहेगा?
✔ बाल अभी मौजूद हैं → PRP / GFC पहले
✔ एरिया खाली हो चुका है → Hair Transplant
✔ Best result के लिए → Transplant + PRP/GFC
सही फैसला scalp examination के बाद ही होता है।
वेरिकोज़ वेन्स क्या है?
वेरिकोज़ वेन्स पैरों की नसों की बीमारी होती है। इसमें नसों के वाल्व कमजोर हो जाते हैं, जिससे खून सही तरीके से ऊपर दिल की तरफ नहीं जा पाता और नसों में जमा हो जाता है। इसी वजह से नसें फूली हुई, टेढ़ी-मेढ़ी और नीली/काली दिखने लगती हैं।
वेरिकोज़ वेन्स के लक्षण
पैरों में दर्द या भारीपन
ज्यादा देर खड़े या बैठे रहने पर सूजन
पैरों में जलन या खुजली
रात में ऐंठन (क्रैम्प)
त्वचा का रंग काला या भूरा पड़ना
नसों का उभरकर दिखना
गंभीर हालत में घाव (अल्सर) या खून निकलना
कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
✔ अगर रोज पैरों में दर्द और सूजन रहती हो
✔ अगर त्वचा का रंग बदलने लगे
✔ अगर चलने-फिरने में परेशानी हो
✔ अगर नसों के पास घाव/जख्म बन जाए
✔ अगर घरेलू उपायों से आराम न मिले
👉 देरी करने पर पैरों में घाव, इंफेक्शन और अल्सर का खतरा बढ़ जाता है।
इलाज के विकल्प
दवाइयाँ (डॉक्टर की सलाह से)
लेज़र ट्रीटमेंट (बिना चीरा, कम दर्द, जल्दी ठीक)
ज्यादा बढ़ी स्थिति में सर्जरी